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अमिताभ बचन के जन्मदिन पर जानिए, दिलचस्प बातें…

वो सदी के ऐसे महानयाक हैं जिनके जैसा ना कोई हुआ था..ना कोई हुआ है..और ना ही कोई होगा…अभिनेता 76 साल के हो गए हैं और उनके जन्मदिन के मौके पर आज हम आपके लिए लाए हैं अमिताभ बच्चन की कुछ अनसुनी कहानियां

वो जहां खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू हो जाती है…वो मुकद्दर के ऐसे सिकंदर हैं जो मौत को भी कई बार मात दे चुके हैं..वो बॉलीवुड के ऐसे डॉन हैं जिन्हें पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है…वो सदी के ऐसे महानयाक हैं जिनके जैसा ना कोई हुआ था..ना कोई हुआ है..और ना ही कोई होगा…महानायक 76 साल के हो गए हैं और उनके जन्मदिन के मौके पर आज हम आपके लिए लाए हैं अमिताभ बच्चन की कुछ अनसुनी कहानियां.

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अमिताभ आज भी जो किरदार निभाते हैं वो यादगार बन जाते हैं. अमिताभ आज भी जो करते हैं वो अलग अंदाज में करते हैं. आज भी अमिताभ का जलवा ऐसा है कि हर रविवार को उनके घर के बाहर उनके चाहने वाले उनकी एक झलक पाने के लिए जमा होते हैं. उम्र अमिताभ के फन को, उनकी कलाकारी को और निखार ही रही है.

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद मे हुआ था. अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन अमिताभ का नाम इंकलाब रखना चाहते थे. लेकिन उनके पिता के दोस्त और मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उन्होंने अपने बेटे का नाम अमिताभ रखा. अमिताभ के सरनेम की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. अमिताभ का सरनेम श्रीवास्तव हुआ करता था. लेकिन उनके पिता ने हरिवंश राय ने अपना पेन नेम बच्चन चुना था, इसलिए अमिताभ ने भी अपने नाम के आगे बच्चन लगा लिया. इस तरह से अमिताभ श्रीवास्तव से वे अमिताभ बच्चन बन गए.

 

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अमिताभ एक इंजिनीयर बनना चाहते थे. उनकी ये ख्वाहिश थी कि वे एक दिन भारतीय वायु सेना में काम करें और देश की सेवा करें. लेकिन उनका ये सपना पूरा नहीं हुआ. अमिताभ पहले कोलकाता में काम करते थे लेकिन फिर बाद में वो अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ गए. अमिताभ का कहना है कि उन्होंने ठान लिया था कि वो किसी कीमत पर घर वापस नहीं जाएंगे.

यह बात भी दिलचस्प है कि अमिताभ एक बार ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी के लिए गए थे. लेकिन उन्हें वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा था, उस वक्त उन्हें ये कहा गया कि उनकी आवाज रेडियो के लिए फिट नहीं है. जबकि आज इसी आवाज के करोड़ों दीवाने हैं. अमिताभ की बेरीटोन वॉयस उनकी शख्सियत का बेहद खास हिस्सा है.

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अमिताभ को उनकी आवाज की वजह से ऑल इंडिया रेडियो में भले ही रिजेक्ट कर दिया था लेकिन अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में अपनी शुरुआत बतौर वोकल नैरेटर के रुप में ही की थी.1969 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म में अमिताभ ने अपनी आवाज दी थी और इसी फिल्म से अमिताभ ने हिंदी फिल्मों में एंट्री की थी. 1977 में सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में भी अमिताभ ने आवाज दी थी.

अभिनेता अमिताभ की पहली फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ थी. 1969 में आई इस फिल्म के निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास थे. फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ अमिताभ की इकलौती ब्लैक एंड वाइट फिल्म थी. फिल्म ‘जंजीर’ ही वो फिल्म है जिसनें बिग बी को इंडस्ट्री का महानायक दिया. फिल्म ‘जंजीर’ से ही अमिताभ को पहचान मिली. लेकिन बता दें कि ‘जंजीर’ से पहले अमिताभ की लगातार 12 फिल्में फ्लॉप हुई थी.

 

 

 

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इसके बाद अमिताभ सुपरस्टार से महानायक बने लेकिन अमिताभ की शादी कैसे हुई. ये किस्सा भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. अब आपको बताते हैं कि अमिताभ और जया बच्चन की शादी कैसे हुई. कैसे फिल्म ‘जंजीर’ का जश्न मनाने के लिए अमिताभ और जया को जल्दबाजी में शादी करनी पड़ी थी. अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया भादुड़ी की पहली मुलाकात पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट में हुई थी. दूसरी बार वे ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर मिले. कहा जाता है ऋषिकेश मुखर्जी ने ‘गुड्डी’ में नायक के तौर पर पहले न सिर्फ अमिताभ बच्चन को चुना था, बल्कि उनके साथ कई सीन भी शूट कर लिए गए थे, लेकिन बाद में अमिताभ को यह कहकर फिल्म से हटा दिया गया, कि वह इस भूमिका में ‘सूट’ नहीं करते. इसके बाद फिल्म में नायक का किरदार समित बांजा को सौंपा गया.

अमिताभ फिल्म ‘गुड्डी’ से भले बाहर हो गए लेकिन जया भादुड़ी के दिल में बने रहे. जब जया राजेश खन्ना के साथ फिल्म ‘बावर्ची’ की शूटिंग कर रहे थे तो अमिताभ वहां उनसे मिलने आया करते थे. rediff.com में छपे एक लेख के मुताबिक एक दिन सेट्स पर अमिताभ को देखकर राजेश खन्ना ने जया भादुड़ी से कहा था “क्यों तुम इस आदमी के साथ घूमती हो. तुम्हारा कुछ नहीं होगा. ये आदमी कभी हीरो नहीं बन सकता. ये मेरा चैलेंज है.”

 

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पत्रकार अली पीटर जॉन के मुताबिक साल 1972 में फिल्म ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दौरान ही एक दिन जया भादुड़ी को राजेश खन्ना के इस बर्ताव से बेहद गुस्सा आ गया. अली पीटर जॉन के मुताबिक उनके सामने ही जया भादुड़ी ने एक बार राजेश खन्ना से कहा था “एक दिन देखना ये कहां होगा और तुम कहां होगे.”

आज अमिताभ के साथ काम करना हर छोटी बड़ी हीरोइन के लिए खुशनसीबी की बात होती है. लेकिन एक दौर ऐसा था जब अमिताभ को फिल्म ‘जंजीर’ के लिए हीरोइन नहीं मिल रही थी. ऐसे में जया भादुड़ी अमिताभ की हीरोइन बनने के लिए राजी हुईं और फिर दुनिया जानती है कि जंजीर के बाद अमिताभ की जिंदगी कैसे बदल गई.

 

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