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देश में सबसे ज्यादा आरक्षण वाला राज्य बना छत्तीसगढ़,मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

नॉएडा: स्वतंत्रता दिवस के पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरक्षण का बड़ा दांव खेला है. उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को प्रदेश में 72 फीसदी आरक्षण दिए जाने की घोषणा की. जबकि अभी तक तीनों वर्गों को मिलाकर 58 फीसद आरक्षण दिया जा रहा था. बघेल सरकार ने आरक्षण के दायरे को बढ़ाकर ओबीसी-एससी समुदाय पर बड़ा सियासी दांव खेला है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इसे जमीन पर उतारने में कामयाब रहते हैं तो देश में सबसे ज्यादा आरक्षण देने वाला राज्य छत्तीसगढ़ बन जाएगा. अभी तक देश में सबसे ज्यादा आरक्षण तमिलनाडु में 69 फीसदी मिलता है. बघेल ने तमिलनाडु से भी ज्यादा 72 फीसदी आरक्षण देने का दांव खेला है.

निकाय चुनाव से पहले आरक्षण दांव

लोकसभा चुनाव में लगे झटके को देखते हुए कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्थानीय निकाय चुनाव में कोई रिस्क लेना नहीं चाहते हैं. महज चार महीने के बाद छत्तीसगढ़ में नगर निकाय चुनाव होने हैं, जिसे कांग्रेस हर हाल में जीतकर अपने वर्चस्व को बरकरार रखना चाहती है. इसी मद्देनजर ओबीसी समुदाय को साधने के लिए भूपेश बघेल ने उनके आरक्षण को दोगुना कर दिया है. आरक्षण के दायरे को बढ़ाने की घोषणा का ओबीसी समुदाय स्वागत कर रहा है.

सीएम भूपेश बघेल ने कहा, ‘मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी है कि हमारे प्रदेश का अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग तबका काफी शांतिप्रिय ढंग से अपने अधिकारों की बात करता रहा है. उनके संविधान सम्मत अधिकारों की रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है.’

छत्तीसगढ़ में 72 फीसदी आरक्षण

बता दें कि छत्तीसगढ़ अभी तक एसटी को 32 फीसदी, एससी को 12 और ओबीसी वर्ग को 14 फीसदी आरक्षण मिल रहा था. भूपेश बघेल सरकार ने एससी समुदाय के 12 फीसदी को बढ़ाकर 13 कर दिया और ओबीसी समुदाय के 14 फीसदी को बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया है. इसके अलावा एसटी समुदाय को 32 फीसदी को जस का तस रखा है. इस तरह से आरक्षण का कुल दायरा 58 से बढ़ाकर 72 फीसदी कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

बता दें कि करीब सात वर्ष पहले छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी. इसके तहत लोक सेवा (एससी, एसटी एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा चार में संशोधन किया गया था. इसके अनुसार अनुसूचित जनजाति को 32, अनुसूचित जाति को 12 और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 फीसद आरक्षण देना तय किया गया था. कुल आरक्षण 58 फीसद था.

यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 फीसद की सीमा से अधिक है. इसके खिलाफ 2012 में ही गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी रायपुर, सतनाम सेवा संघ रायपुर, पीआर खुंटे समेत अन्य ने याचिकाएं लगाई थीं. याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को सुनवाई के लिए हस्तांतरित कर दिया था. हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित है.

मोदी का सवर्ण आरक्षण बनेगा ढाल

हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देकर 50 फीसदी दायरे को तोड़ दिया है. मौके की नजाकत को समझते हुए अपने राजनीतिक समीकरण को देखते हुए बघेल ने 72 फीसदी आरक्षण का दांव चल दिया है. छत्तीसगढ़ में 51 फीसदी आबादी पिछड़ा वर्ग की है. ऐसे में आरक्षण का दायरा बढ़ाकर इस बड़े तबके को साधने की कवायद की गई है.

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