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बच्चो की वार्षिक परीक्षा में तनाव से निपटने की कोशिश

फरवरी के अंत तक शुरू होने वाली वार्षिक परीक्षाओं के साथ, न केवल तनाव से निपटने की कोशिश करने वाले छात्रों के कॉल से हेल्पलाइन भर जाती हैं, बल्कि माता-पिता भी अपने बच्चों को आईपैड और स्मार्टफोन से अलग करने के लिए बेताब हो जाते हैं ताकि वे अपने शोध कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

अपने मोबाइल फोन पर इतना समय बिताने के बावजूद, छात्र अपनी परीक्षाओं में अच्छा करने के लिए आश्वस्त है। लेकिन उसके माता-पिता को लगता है कि प्रारंभिक परीक्षाओं में उसका प्रदर्शन सही नहीं है। माता-पिता के फोन को जब्त करने के बाद कई छात्र बेचैन और कर्कश हो जाते हैं। माता-पिता को अचानक छात्रों को अपने फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं देने के बजाय, शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में धीरे-धीरे अपने बच्चों से गैजेट को दूर करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चो का परफॉरमेंस में जरूर बदलाब  आएगा।

कुछ छात्रों ने कहा की कुछ देर के लिए सोशल साइट्स स्ट्रेस कम करने में मदद करता है। उसके बाद कुछ भी करने में बहुत मज़ा आता है,एक नयी ऊर्जा का संचार होने लगता है। यह तोह बिलकुल गलत बात है की केवल फेसबुक,यूट्यूब एवं अन्य सोशल साइट पर लगे रहना और पढाई नहीं करना।इस से तोह लाजमी ही रिजल्ट पे इफ़ेक्ट पड़ेगा।मेमोरी बढ़ाने वाली गोलियों की पूरी अवधारणा एक मिथक है।

बाजार में मिलने वाले कुछ दवा और भ्रामक विज्ञापन के नाम से ही माता-पिता को गुमराह करता है। कुछ सूक्ष्म पोषक कमियां हैं जो मनोभ्रंश, खराब एकाग्रता और मस्तिष्क से संबंधित अन्य मुद्दों को जन्म दे सकती हैं। उन बीमारियों को देखरेख में उचित निदान और उपचार की आवश्यकता होती है। मेमोरी पिल्स के साथ नहीं किया जा सकता है।

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