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सभी देशों में अलग-अलग महत्तव से मनाई जाती है गणेश चतुर्थी

भारत के लगभग हर हिस्से में अलग-अलग तरीके से गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। हिदूं लोगों के अलावा महाराष्ट्र, गोवा, केरल और तमिलनाडु में भी यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन उन्होंने जन्म लिया था। गणेश चतुर्थी के दिन उनकी मूर्ति को घर में स्थापित करके कुछ दिनों बाद विसर्जन किया जाता है।

गणेश चतुर्थी के दिन उनकी मूर्ति को घर में स्थापित करके कुछ दिनों बाद विसर्जन किया जाता है।

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गणेश जी को घर में स्थापित करने के बाद रोज उनकी पूजा की जाती है। और आखिरी दिन में नदी में विसर्जन किया जाता है। इसके साथ ही अगले साल बप्पा को फिर से आने के लिए कहा जाता है। भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा के चलते कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते है।

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इस दिन के बारे में सबके अलग-अलग विचार है। कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन माता पार्वती ने अपने शरीर में हल्दी का लेप लगाया था और उसे हटाने के बाद गणेश जी का जन्म हुआ। इसके बाद वो पार्वती और शिव भगवान के पुत्र कहलाने लगे।

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हजारों साल से मनाया जाने वाला यह त्यौहार अंग्रेजो के समय में शुरु किया गया था। इस समय युवकों में अपने धर्म के प्रति नकारात्मकता और अंग्रेजी आचार-विचार के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था। जिसके कारण हिंदुओं ने युवकों को हिंदु धर्म की महत्तवा समझाने के लिए इस त्यौहार को शुरु किया था।

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केरल और तमिलनाडु में इस त्यौहार को मराठा सम्राट के समय से मनाया जाता है। गणेश भगवान मराठा सम्राट के शिवाजी के कुल देवता थे। जिसके कारण उनके समय से इस त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है।

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गणेश चतुर्थी को गौरी पर्व भी कहा जाता है। श्री गणेश माता पार्वती के सबसे ज्यादा करीब होने ते कारण इसे माता गौरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि माता गौरी ने औरतों के मान सम्मान को बढावा देने का आशीर्वाद दिया था। जिसके कारण इसे गौरी पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

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