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भारतीय इंटेलिजेंस ब्यूरो ने किया था आपरेशन चक्रव्यूह लांच – राजीव यादव

आतंकी घटना का एलर्ट देने वाली आईबी बुलंदशहर में कहां थी- रिहाई मंच

आईबी का आपरेशन चक्रव्यूह तो नहीं हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम

चक्रव्यूह जैसे आपरेशन से आईबी सोशल मीडिया पर नकली अकाउंट बनाकर मुसलमान युवाओं को करती है चिन्हित

जाकिर मूसा को एटीएस अंसार-गजवत-उल-हिंद का चीफ तो एनआईए हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम का आतंकी बताती है

लखनऊ 31 दिसंबर 2018। रिहाई मंच ने कहा कि योगी बताएं कि किसानों की ट्रैक्टर ट्राली का हाइड्रोलिक पंप उनके राज में आते ही कैसे राकेट लांचर हो गया। अगर ऐसा है तो सूबे के किसानों से लेकर नगर निगमों तक की गाड़ियों क्यों नहीं कर देते सीज। मंच ने खबरों के जरिए मुस्लिम समुदाय के छात्र, इंजीनियर, मुफ्ती-मौलवी को एटीएस और एनआईए द्वारा आतंकवाद के नाम पर बदनाम करने का आरोप लगाया है। एजेंसियां पहले बताएं कि आईएस जैसे खतरनाक आतंकी संगठन क्या ट्रैक्टर के जैक से राकेट लांचर और बुरादे को बारुद बनाकर घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं।

यूपी को आतंकियों के निशाने पर बताने वाले योगी आदित्यनाथ के बयान पर रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि आईबी उस वक्त कहां थी जब सैकड़ों गौआतंकियों ने बुलंदशहर में उनके इंस्पेक्टर को दौड़ाकर गोली मार दी थी। आरोप लगाया कि यूपी और दिल्ली से हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम के नाम पर हुई गिरफ्तारियों और फर्जी बरामदगी पर सवाल उठने के बाद एजेंसियां कभी जाकिर मूसा, उजेफा उर्फ हुजैफा तो कभी किसी मौलाना की तलाश का शगूफा छोड़ रही हैं। झूठ इतना खुलकर बोला जा रहा है कि जिस जाकिर मूसा को एटीएस अंसार-गजवत-उल-हिंद का चीफ और कश्मीर घाटी का टाॅप आतंकी बताती है उसी को एनआईए हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम से जुड़ा आतंकी।

एजेंसियों के बयान हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम की सच्चाई को उजागर कर देते हैं। यूपी एटीएस ने अंसार-गजवत-उल-हिंद के जाकिर मूसा के अमरोहा में होने की खुफिया सूचना पर सर्च अभियान चलाने के दौरान हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी का दावा किया था। अब जब उसी जाकिर को एनआईए हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम से जुड़ा बता रही है तो एजेंसियां पहले तय करें कि जाकिर किस संगठन से जुड़ा है।

देसी कट्टे-सुतली पटाखे से देश पर बड़े हमले की तैयारी करवाने वाले विदेशी आका उजेफा उर्फ हुजैफा को पाकिस्तानी बताया जा रहा है। पाक-अफगानिस्तान सीमा पर छुपा बैठा ऐसे बताया जा रहा है जैसे एनआईए देख रही है। आखिर सवाल है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अगर प्रश्रय दे रहा है तो हुजैफा वहां क्यों छुप कर बैठेगा। ठीक इसी तरह अब्दुल्ला बासित को भारत-पाक सीमा पर बताया जा रहा है।

रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि आईएस की झूठी कहानी पर सवाल न उठे और दहशत का माहौल बना रहे इसके लिए मीडिया के जरिए अफवाह फैलाई जा रही है। जाकिर मूसा की लोकेशन कानपुर और लखनऊ तो कभी मुरादाबाद मंडल में होने की सूचना के नाम पर दहशत फैलाई जा रही है। गुपचुप छापेमारी और लेदर कारोबारियों से अवैध वसूली की भी ऐसे में पूरी संभावना है। ठीक इसी तरह एक रहस्यमयी मौलाना के बारे में खबरें फैलाई जा रही हैं कि वो आरोपियों के घर आता था जिसके बारे में घर-गांव वालों तक को कोई जानकारी नहीं। पहला सवाल है कि कोई भी व्यक्ति किसी से मिलता है तो उसका नाम तो पूछता ही है। दूसरा कि असुरक्षा से घिरा मुस्लिम समाज बिना पहचान के किसी को ठहराना तो दूर बातचीत से भी बचता है।

हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम का संचालक तो कभी आईएस का यूपी इंचार्ज बताए जाने वाले सुहैल पर आरोप है कि उसके फेसबुक पर जेहाद से संबन्धित पेज को फाॅलों करने के बाद फ्रेंड रिक्वेस्ट आई और वहीं से वह आईएस के ट्रैप में गया। भारतीय इंटेलिजेंस ब्यूरो ने आइएस से जुड़े लड़कों को पकड़ने के लिए आपरेशन चक्रव्यूह लांच किया था। यह सोशल मीडिया पर नकली अकाउंट बनाकर मुस्लिम युवाओं को चिन्हित करता था। अमरोहा से ट्रैक्टर के जैक को राकेट लांचर और बुरादे को बारुद कहने वाली एनआईए का कहीं यह चक्रव्यूह तो नहीं था। ये खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली का हिस्सा है जिसके जरिए वो अपने अधिकारियों-कर्मचारियों तक पर आपरेशन चलाती हैं। सुहैल को फेसबुक पर रिक्वेस्ट आने और उसके लखनऊ आकर सोना बेचने की कहानी से लेकर हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम की कहानी ऐसे ही पेचों में फंसी नजर आती है। युवाओं की टोली चंदा जुटाकर बारावफात का जुलूस या दुर्गा पूजा मनाती है लेकिन आतंकी संगठन बनाने की बात पचती नहीं। यह हास्यास्पद थ्योरी है कि आईएस से पैसा नहीं मिला इसलिए धर्म के नाम पर फंड जुटाया जा रहा था। वैसे भी फंडिग जैसी प्रक्रिया को साबित करना आसान नहीं होता।

आईएस से जुड़ा बताकर युवाओं को डिरेडिकलाइज करने के बहाने गवाह और मुखबिर तैयार करना पुराना पैतरा रहा है। वजीरगंज के नबीउल्ला रोड निवासी मां-बेटे के मामले में यही दिखता है। ठीक इसी तरह सैफुल्लाह मामले में कानपुर के आतिफ ने जब गवाह बनने से इनकार कर दिया तो उसे कई महीने बाद खतरनाक आतंकी कहकर गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए आईएस अगर देश के युवाओं को आतंकी बना रहा है तो आखिर उन माध्यमों को भारत सरकार प्रतिबंधित क्यों नहीं करती। क्या उसका काम यह है कि देश का युवा आतंकी बने और वो उसे पकड़े या कि उसको आतंकी बनने ही न दे।

आटो चालक इरशाद के ऊपर बछरायूं थाने में गोकशी का मामला दर्ज हुआ था। ठीक इसी तरह बुलंदशहर मामले में योगेश राज ने गोकशी के मामले में जिनके खिलाफ फर्जी मामला दर्ज करवाया दरअसल उनसे मस्जिद पर लाउड स्पीकर लगाने को लेकर विवाद हुआ था। यह दोनों घटनाएं साफ करती हैं कि सुनियोजित साजिश के तहत इस तरह के मामले कहीं बजरंग दल जैसे संगठन तो कहीं एजेंसियां कर रही हैं।

आम जनता से रिहाई मंच ने अपील की कि खुफिया सूत्रों के हवाले से नए साल, गणतंत्र दिवस और कुंभ पर हमले की साजिश के नाम पर फैलाई जा रही अफवाहों से सतर्क रहें। ये सालों पुराना हथकंडा है। मंच ने एनआईए और एटीएस को याद दिलाया कि ठीक इसी तरह जनवरी 2016 में लखनऊ से मोदी के दौरे के दिन अलीम की गिरफ्तारी और ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जब ठीक इसी वक्त इस तरह की कार्रवाईयां की गईं। रही बात राम मंदिर पर हमले की जब भाजपा पूरी ताकत लगाकर भी लोगों को भ्रमित करने में सफल नहीं हो पाई तो वह काम अगर आतंकी करेंगे तो वो इनके दोस्त होंगे न कि दुष्मन। जो इसके नाम पर धु्रवीकरण के खेल को तेज करने में उनकी मदद करेंगे। गौरतलब है कि पिछली 26 जनवरी को आतंकी हमले के खतरे के जो पोस्टर लगे उसमें दर्ज युवकों को एजेंसियां कई बार मृत घोषित कर चुकी हैं। उनके परिजनों का आरोप है कि वो होंगे तो इन्हीं खुफिया-सुरक्षा एजेंसियों के पास।

राजीव यादव (मानवाधिकार कार्यकर्ता रिहाई मंच)

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