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वो वकील जिन्होंने उम्र के ख़िलाफ़ स्टे ले रखा था,जेठमलानी का निधन

वरिष्ठ वकील रहे राम जेठमलानी का रविवार को अपने दिल्ली स्थित आवास पर देहांत हो गया। वह 96 वर्ष के थे।

नॉएडा:जाने-माने वकील और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में क़ानून मंत्री रहे राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविवार सुबह निधन हो गया. जेठमलानी बार काउंसिल के चेयमैन भी रहे थे.

जेठमलानी ने कई हाई प्रोफ़ाइल आपराधिक मुक़दमों को लड़ा था और इस मामले में उनकी काफ़ी प्रतिष्ठा भी रही है. जेठमलानी का जन्म 14 सितंबर, 1923 में हुआ था. 1

17 साल की उम्र में जेठमलानी ने क़ानून की डिग्री ले ली थी. इनका जन्म वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के वक़्त भारत में आ गए थे.

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1959 में ही नानावती केस में जेठमलानी ने अपनी पहचान बना ली थी. इसके बाद से वो क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिस के दिग्गज चेहरा बन गए. जेठमलानी के दो बेटे और दो बेटियां हैं. इनमें से महेश जेठमलानी और रानी जेठमलानी भी जाने-माने वकील हैं.

2014 में आम चुनाव से पहले जेठमलानी ने नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने का समर्थन किया था. हालांकि मोदी के पीएम बनने के बाद जल्द ही वो ख़िलाफ़ हो गए थे. 2015 में अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का मुक़दमा दर्ज किया तो जेठमलानी ने केजरीवाल की पैरवी की थी.

राम जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे। इनकी गिनती देश के नामचीन क्रिमिनल वकीलों में की जाती रही है। वे भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राम जेठमलानी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. मोदी ने ट्वीट कर कहा, ”राम जेठमलानी के निधन से भारत ने एक असाधारण वकील और प्रतिष्ठित हस्ती को खो दिया है, जिसका योगदान अदालत और संसद दोनों में था. वो विलक्षण, साहसी और किसी भी विषय पर खुलकर बोलने से नहीं डरने वाले व्यक्ति थे.

उनका सबसे अच्छा पहलू यह था कि वो अपने मन की बोलने की क्षमता रखते थे. वो डरते नहीं थे. आपातकाल के दौरान भी जेठमलानी ने लोगों की लड़ाई लड़ी थी. ज़रूरतमंदों की मदद करना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था. मैं ख़ुद को भाग्यशाली मानता हूं कि कई मौक़ों पर उनसे बात करने का मौक़ा मिला. इस दुखद घड़ी में मेरी संवेदना उनके परिवार के साथ है. वो अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका काम ज़िंदा रहेगा. ओम शांति

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