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आम-दोस्ती और गुस्सा, अक्षय कुमार से PM मोदी ने की मन की ये बड़ी बातें…

PM ने बताया कि मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता. अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं. उन्होंने कहा कि सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं.

प्रधानमंत्री ने की मन की बात...  .

प्रधानमंत्री ने की मन की बात  लोकसभा चुनाव के प्रचार प्रसार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा इंटरव्यू दिया है जिसमें गैर राजनीतिक बातें कही गई हैं. ये इंटरव्यू बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने लिया है, जिसमें पीएम ने अपने परिवार, अपने निजी जीवन से जुड़ी बातों को दुनिया के सामने रखा. करीब 69 मिनट के इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बातों को सामने रखा, जो शायद अब तक अनसुनी थीं.

1.    सेना में जाने की इच्छा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरव्यू में अपने सपने को लेकर भी बात की, उन्होंने बताया कि उनके मन में कभी प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया. उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं और मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड हैं उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गांव को गुड़ के पुए खिला देती.

PM ने बताया कि वह 1962 की जंग से प्रभावित हुए, जब कभी फ़ौज वाले निकलते थे तो बच्चों की तरह खड़ा होकर उन्हें सैल्यूट करता था तभी मन करता था कि सेना में भर्ती हो जाऊं.

2. क्या बनना चाहते थे और क्या बन गए

सेना में भर्ती होने के अलावा वह क्या करना चाहते थे? इस पर प्रधानमंत्री ने बताया कि मैं रामकृष्ण मिशन आश्रम में चला गया. नए-नए अनुभव होने लगे. 20 साल के आसपास की उम्र में ही बहुत घूमा, भटका और दुनिया देखी. मन में सवाल पैदा करता था और कुछ जवाब तलाशता था और भटकते-भटकते यहां तक पहुंच गया. मैं क्या बनता ये कहना कठिन लग रहा है क्योंकि जो सोचा नहीं था वो (प्रधानमंत्री) बन गया.

3.    कितने सख्त हैं PM मोदी?

PM ने बताया कि मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता. अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं. उन्होंने कहा कि सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं.

4.    गुलाम नबी अच्छे दोस्त, ममता दीदी भेजती हैं कुर्ते

प्रधानमंत्री ने बताया कि कांग्रेस के गुलाम नबी आज़ाद उनके काफी अच्छे दोस्त थे. काफी पहले जब मैं और गुलाम नबी बातें कर रहे थे तो मीडिया ने पूछा कि ये तो संघ वाले हैं और आप इनके दोस्त हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी साल में एक-दो कुर्ते खुद चुनकर देती हैं. इसके अलावा बांग्लादेश की शेख हसीना भी उन्हें हर साल मिठाईयां भेजती हैं.

5.    पिताजी गुस्सा करते थे तो क्या करते थे मोदी?

PM ने कहा कि मैं कभी किसी से मिलता हूं तो मेरा कभी कोई फोन नहीं आता है, मैंने खुद को जीवन को ऐसा अनुशासित बनाया है. जहां तक ह्यूमर का सवाल है तो मेरे परिवार में मैं हमेशा पिता जी की नाराजगी होते थे तो पूरे माहौल को हल्का कर देता था.

6.    चुटकुले सुनते-सुनाते हैं मोदी

इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने बताया कि मेरी सख्त छवि जो बनाई गई है वो सही नहीं है. मैं काम के लिए किसी पर दबाव नहीं बनाता हूं. मैं सुबह से देर तक प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठता हूं, पहले ऐसा नहीं होता था. इस तरह टीम स्प्रिट बनती है और मेरे आसपास ये एक वर्क कल्चर बन जाता है.

उन्होंने कहा कि मीटिंग के वक्त अगर कोई मोबाइल में अपना वक्त खराब कर रहा है तो मैं पूछता हूं कि अभी मैं जो कह रहा था उसका क्या हुआ. तब से मेरी मीटिंग में कोई मोबाइल फोन यूज नहीं करता. मैं हमेशा बैठक में माहौल हल्का करने की कोशिश करता हूं.

7.    मोदी के खाते में कितना पैसा?

अक्षय के साथ बात करते हुए मोदी ने बताया कि जब मैं गुजरात से CM बना तो मेरा बैंक अकाउंट नहीं था. जब MLA बना तो सैलरी आनी लगी. स्कूल में देना बैंक के लोग आए थे.

उन्होंने बच्चों को गुल्लक दिया और कहा कि इसमें पैसे जमा करें और बैंक में जमा कर दें. लेकिन हमारे पास होता तब तो डालते. तब से अकाउंट यूं ही पड़ा रहा.

पीएम ने बताया कि सरकार की तरफ से एक प्लॉट मिलता है, कुछ कम दाम में मिलता है, फिर मैंने वो पार्टी को दे दिया हालांकि कुछ नियम है जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला है. जैसे ही वह क्लियर होगा, प्लॉट मैं पार्टी के नाम कर दूंगा.

8. रिटायर होने के बाद क्या करेंगे मोदी?

रिटायरमेंट के सवाल पर जवाब देते हुए PM मोदी ने एक किस्सा सुनाया. नरेंद्र मोदी ने बताया, ‘हम लोगों की एक इनर सर्कल की मीटिंग थी. अटल जी, आडवाणी जी, राजमाता सिंधिया जी, प्रमोद महाजन जी थे. उसमें सबसे छोटी आयु का मैं था. उसमें ऐसे ही बात छिड़ी कि रिटारटमेंट के बाद क्या करेंगे. मुझे पूछा तो मैंने कहा, मेरे लिए तो बहुत कठिन है. मुझे जो जिम्मेवारी मिलती है, वही करता जाता हूं. इसलिए मेरे मन में कभी ऐसा कोई विचार नहीं आया.

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