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रविंद्रनाथ टैगोर ने विज्ञापन भी किये थे

Sakshi Verma

रविंद्रनाथ टैगोर के बारे में सभी ने तो सुना ही होगा. गीतांजली के लिए साहित्य का नोबेल जीतने वाले रवींद्र की बड़ी पहचान भारत के राष्ट्रगान के रचयिता की है. टैगोर ने कई तरह से अपनी हिस्सेदारी दी है- कला, साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन. गुरुदेव और उनके परिवार वालों के खास प्रभाव भारतीय लोगों के कपड़े पहनने के ढंग और फैशन पर है.

सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि रविंद्रनाथ टैगोर ने कई विज्ञापन भी करे हैं. टैगोर ने अपने जीवन में 500 से ज्यादा विज्ञापन किए हैं. उस वक्त के विज्ञापनों में टैगोर की बाते लिखी होती थी. गोदरेज साबुन, रेडियम स्नो (क्रीम), प्रोडक्ट बॉर्नविटा और विदेशी प्रोडक्ट्स में उन प्रोडक्ट्स की तारीफ लिखी होती थी. इस चीज के लिए वह पैसे लेते थे या नहीं यह तो नहीं पता पर उन्होंने विदेशी प्रोडक्ट्स में विज्ञापन भी किया था.

रविंद्रनाथ के उस वक्त में महिलाओं को ब्लाउज के लिए टोका जाता था. महिलाएं अपने पति की फैंटेसी को पूरा करने के लिए बेडरूम में छिपकर ब्लाउज पहनती थी और राज़ खुल जाने पर सांस से डाट सुनने को मिलती थी. टैगोर परिवार की बहू ज्ञाननंदनी देवी ने अपनी इंग्लैंड और बॉम्बे की यात्राओं के अनुभवों और पारसी गारा पहनने के तरीकों को मिलाकर साड़ी पहनने का वो तरीका निकाला जो आज प्रचलन में है. इसे ब्रह्मिका साड़ी कहा गया क्यूंकि ब्रह्मसमाज की औरतों ने इसे सबसे पहले अपनाया. गुरुदेव ने भी महिलाओं के साड़ी पहनने के तरीके की खूब वकालत की,यहां तक की साड़ी पहनना सीखने के लिए विज्ञापन भी छपे.

 

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