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‘जेट को बचाने के लिए 25000 करोड़ रुपये लगाने होंगे, यह हमारे बस की बात नहीं’

स्पाइसजेट ने जेट एयरवेज के लिए बोली इसलिए नहीं लगाई क्योंकि उसके रिवाइवल के लिए फंड का इंतजाम करना एयरलाइंस के लिए संभव नहीं था। स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने ईटी नाउ की नयनतारा राय को दिए इंटरव्यू में बताया कि मीडिया में 8,000-8,500 करोड़ की फंडिंग का जिक्र हो रहा है, लेकिन असल में यह इससे तीन गुना ज्यादा है। सिंह ने यह भी कहा कि मई-जून तक कैपेसिटी बढ़ने के साथ हवाई किराये सामान्य हो जाएंगे।
जेट एयरवेज का कामकाज अस्थायी तौर पर बंद हो गया है, इससे स्पाइसजेट के लिए कितना बड़ा मौका बना है? 
हम चाहते हैं कि जेट एयरवेज बच जाए और उसका ‘पुनर्जन्म’ हो। हालांकि, अभी यह काम मुश्किल दिख रहा है। जहां तक स्पाइसजेट की बात है, हम कैपेसिटी गैप को भरना चाहते हैं। यात्रियों को दिक्कत हो रही है। किराये बढ़ गए हैं। कुछ क्षेत्रों के लिए हवाई यात्रा का विकल्प ही बंद हो गया है। जेट के 16-17 हजार एंप्लॉयीज के बेरोजगार होने का भी डर है। हम जहां तक हो सकेगा, इन लोगों को अपने यहां काम देंगे। हम पहले ही जेट के 1,000 लोगों को नौकरी दे चुके हैं। हम और लोगों को अपने यहां एडजस्ट करने की कोशिश करेंगे।

आपने जेट के लिए बोली क्यों नहीं लगाई?
 
हमने आंकड़े देखे थे। हमसे कई स्टेकहोल्डर्स ने भी संपर्क किया था। जेट को खरीदना हमारे बस की बात नहीं है। मीडिया 8,000-8,500 करोड़ के फंडिंग गैप की बात कर रहा है, लेकिन असल में यह कहीं ज्यादा है।

आपके हिसाब से फंडिंग गैप कितना है? 
हमारे अनुमान के मुताबिक यह 25,000 करोड़ है। इसमें वेंडर का बकाया, ग्राहकों से टिकट के लिए लिया गया अडवांस पेमेंट और कंपनी पर कर्ज सब शामिल हैं। स्पाइसजेट के लिए इतनी रकम का इंतजाम करना संभव नहीं है। हमने अनुमान लगाया कि जेट को रिवाइव करने के लिए शुरू में 11,000 करोड़ रुपये लगाने होंगे।

आप जेट के कितने प्लेन और रूट्स को टेकओवर करने जा रहे हैं? 
हमने पांच प्लेन जोड़े हैं, जो शुक्रवार से उड़ान भरना शुरू करेंगे। आने वाले कुछ हफ्तों में हम 40 प्लेन जोड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। हम स्लॉट के बंटवारे को लेकर डीजीसीए के भी संपर्क में हैं। हमारी टीम पता लगा रही है कि किन रूट्स पर उड़ानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। हम उन्हीं रूट्स पर नए प्लेन का इस्तेमाल करेंगे। अगर जेट बच जाती है (हम ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि ऐसा ही हो) और फिर से काम शुरू करती है, तो भी उसका स्केल पहले जितना बड़ा नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि हमारे लिए विस्तार की गुंजाइश बनी रहेगी।

क्या सरकार ने आपको डोमेस्टिक कैपेसिटी बढ़ाने को कहा है? मिसाल के लिए, एयर इंडिया जेट के लंदन, दुबई और सिंगापुर रूट्स पर कब्जा चाहती है… 
हम दोनों की ही कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्राथमिकता डोमेस्टिक रूट्स पर कामकाज बढ़ाने की है। मैं एयर इंडिया के कदम का स्वागत करता हूं।

हवाई किराये आसमान पर पहुंच गए हैं और लोगों में इसे लेकर नाराजगी है। एयरलाइंस ग्राहकों के हितों का ख्याल क्यों नहीं रख रही हैं? 
यह डिमांड और सप्लाई का मामला है। अगर डिमांड अधिक हो तो आप कृत्रिम ढंग से किराये को निचले स्तर पर नहीं रख सकते। जब भी मांग अधिक होगी, किराये बढ़ेंगे।

हवाई किराये में 40 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है और दिल्ली-मुंबई का किराया तो 30,000 रुपये तक पहुंच गया है…
कैपेसिटी बढ़ाने पर ही इस मसले का हल निकलेगा। स्पाइसजेट ऐसा ही करना चाहती है। सिर्फ हमारी कंपनी ही नहीं, दूसरी कंपनियां भी इस बीच कैपेसिटी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

आपको कब तक किराया घटने की उम्मीद है? 
जैसे ही कैपेसिटी बढ़ेगी, किराये कम होने लगेंगे। हम मई और जून तक इसके नीचे आने की उम्मीद कर रहे हैं।

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